सुपौल। प्रतापगंज डाक बंगला परिसर में आयोजित वृहद नौ दिवसीय राम कथा और दुर्लभ सत्संग में श्रोताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। ऋषिकेश से पधारे ब्रह्मचारी संत गोविंद जी महाराज की मधुर वाणी, सुमधुर भजनों और राम जीवन की झांकी प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
कथा के चौथे दिन संत गोविंद जी महाराज ने राम विवाह के प्रसंग के साथ भगवान महादेव की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैलाश पर्वत भगवान शिव का निवास स्थान है, जिनकी महिमा तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। वे भगवान राम के अनन्य भक्त थे और सदैव 'राम राम' का जाप करते थे। कथा में पार्वती जी की जिज्ञासा और भगवान शिव द्वारा राम जन्म, सीता विवाह और राम वनगमन की कथा सुनाने का प्रसंग भी सुनाया गया।
संत ने कहा कि भगवान ने इतनी सुंदर सृष्टि बनाई है कि पूरे संसार में एक ही शक्ल के दो चेहरे नहीं मिलते। कोई गोरा है, कोई काला, कोई नाटा है, तो कोई लंबा। जब भगवान के पास इतने सांचे हैं, तो उनकी सुंदरता की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि भगवान राम को पांच कारणों से धरती पर अवतरित होना पड़ा। जब भी भगवान को लीला करनी होती है, वे संतों के हृदय में बस जाते हैं और उन्हीं के वेश में संसार की लीला देखने आते हैं।
संत गोविंद जी महाराज ने कहा कि भजन की कोई सीमा नहीं होती, भक्तों को भगवान कभी भी मिल सकते हैं। उन्होंने शालीग्राम पूजा की महत्ता बताते हुए कहा कि इसकी पूजा तभी फलदायी होती है जब तुलसी का जल अर्पित किया जाता है। उन्होंने बताया कि शालीग्राम की पूजा महिलाओं द्वारा नहीं की जाती, और महिलाओं को हनुमान जी की पूजा उन्हें स्पर्श कर नहीं करनी चाहिए क्योंकि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे।
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