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सहस्त्र चंडी महायज्ञ में श्रीमद् भागवत कथा का हो रहा आयोजन, आदिशक्ति की महिमा का हुआ गुणगान


सुपौल। सदर प्रखंड के कर्णपुर स्थित बाबापीठ में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथा वाचक पूज्य व्यास शुकदेवानंद जी महाराज ने आदिशक्ति की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि जब-जब देवताओं पर संकट आया, तब-तब उन्होंने मां भगवती की शरण ली और उनकी कृपा से संकटों का निवारण हुआ। उन्होंने भक्तों को संदेश दिया कि संपूर्ण सृष्टि में शक्ति ही सर्वोपरी है और प्रत्येक मनुष्य को भगवती की आराधना कर उनके चरणों में समर्पित होना चाहिए, क्योंकि वे ही संकटमोचक और कल्याणकारी हैं।

इस अवसर पर पंडित श्रीधर झा, पंडित गोविंद मिश्र, पंडित मणिरमण, पंडित चंदन झा, पंडित मनोज झा, पंडित कुंदन राय, पंडित आशीष झा सहित कई विद्वान आचार्यों ने पूजा-अर्चना की। वहीं, कर्णपुर, मलहनी, सुखपुर, सुपौल सहित विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने इस दिव्य अनुष्ठान में भाग लिया और अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। भक्तों ने कहा कि इस महायज्ञ में शामिल होने से उन्हें एक अलौकिक शक्ति की अनुभूति हुई, जो उनके जीवन को शुभता और सकारात्मकता से भर देगी।

महायज्ञ का संचालन कर रहे गुरुदेव शिवाचार्य पंडित जीवेश्वर मिश्र ने यज्ञ की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का आधार है। उन्होंने बताया कि बाबापीठ, कर्णपुर जैसे सिद्ध स्थलों पर किए गए यज्ञों की शक्ति कई गुना अधिक होती है, जिससे इसका प्रभाव संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त होता है। उन्होंने यह भी कहा कि परमहंस बाबा निश्चलानंद नाथ जी की तपस्या और साधना से इस भूमि में विशेष दिव्यता है, जिसके कारण यहां किया गया यज्ञ शीघ्र फलदायक होता है।

सहस्त्र चंडी महायज्ञ को दैवीय शक्तियों को प्रसन्न करने और नकारात्मक ऊर्जा के नाश का सर्वोत्तम उपाय बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे अनुष्ठान समाज में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करते हैं।

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