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बाबा पीठ कर्णपुर कालीधाम में सहस्त्र चंडी महायज्ञ का हुआ भव्‍य शुभारंभ



सुपौल। बाबा पीठ कर्णपुर कालीधाम में नवरात्रि के पावन अवसर पर सहस्त्र चंडी महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। यह महायज्ञ दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है, जो संपूर्ण नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं के कल्याण हेतु संपन्न होगा। इस यज्ञ का संचालन गुरुदेव शिवाचार्य पंडित जीवेश्वर मिश्र के निर्देशन में पंडितों, आचार्यों एवं मायेरप्रेमीगण द्वारा किया जा रहा है, जिसमें शक्ति साधना, वेद-मंत्रों का जाप, आहुति एवं देवी महात्म्य का पाठ विशेष रूप से किया जा रहा है।

नित्य 51 पंडितों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ एवं हवन किया जा रहा है। पहले दिन मुख्य यजमान के रूप में प्राणेश्वर मिश्र ने पूजन किया। तत्पश्चात, शिवाचार्य पंडित जीवेश्वर मिश्र ने ऋग्वेद की चर्चा करते हुए कहा कि अग्ने यज्ञस्य होतारं विश्वतोमुखम्। सत्यं तं त्वामहं वन्दे विश्वे देवाः सशक्तिकाः॥

उन्होंने बताया कि यज्ञ के माध्यम से समस्त देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है, जिससे संपूर्ण सृष्टि में संतुलन एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। हवन कुंड से उत्पन्न औषधीय धुएं से पर्यावरण शुद्ध होता है, रोगाणुओं का नाश होता है एवं वर्षा चक्र संतुलित रहता है। इस पावन अनुष्ठान से श्रद्धालुओं के मन में भक्ति एवं शक्ति का संचार होता है, जिससे समाज में सौहार्द, सद्भाव और शांति का विस्तार होगा।

शिवाचार्य ने आगे कहा कि सहस्त्र चंडी महायज्ञ से नकारात्मक शक्तियों का नाश, सकारात्मक ऊर्जा का संचार, ग्रह दोषों का निवारण, सामाजिक समृद्धि एवं आत्मशुद्धि होती है। मंत्रों का जप एवं यज्ञीय आहुतियाँ मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली होती हैं। वेदों एवं पुराणों में वर्णित है कि इस यज्ञ से देवी भगवती प्रसन्न होती हैं और साधकों को अभय प्रदान करती हैं।

इस महायज्ञ के अंतर्गत देवी भागवत कथा का आयोजन भी किया जा रहा है। कथा के दौरान व्यासश्री शुकदेवानंद नाथ ने देवी भागवत की पूजा-अर्चना एवं आरती संपन्न कर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह भक्तों के लिए एक जीवनदायिनी साधना है, जो धर्म, भक्ति, शक्ति और साधना की उच्चतम ऊँचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगी।

सहस्त्र चंडी महायज्ञ में प्रमुख रूप से आचार्य चंदन झा, पंडित मणिरमण, पंडित वैद्यनाथ झा, पंडित मनोज मिश्रा, पंडित वीरेंद्र मिश्रा, पंडित विपिन झा सहित 51 आचार्य एवं पंडित उपस्थित रहे।

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